गाता है छोकरा: तीन लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
गाता है छोकरा: तीन लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 19 नवंबर 2010

गाता है छोकरा: तीन

                                             'हमकलम' में  इस कविता के लिए रेखांकन :कैरन हैडॉक

छोकरा
लिए रहता है
टुकड़े एसब्‍सटास की चादर के
दो-दो छोटे टुकड़े

फंसाकर
उंगलियों के बीच
बजाता है छोकरा
गाता है गीत
इकट्ठा करता है मजमा

मजमा
सुनता है
छोकरे के बचपन से
जवानी के गीत
और उसकी आने वाली जवानी को
बना देता है बुढ़ापा

छोकरा
गाता है रखकर कलेजा
गले में
दो सांप लहराते हैं
उसके गले में

छोकरे की आंख में
होता है
दो रोटियों का आकाश और
एक कप चाय का गहरा समुद्र

छोकरा
लिए रहता है
टुकड़े एसब्‍सटास की चादर के
दो छोटे-छोटे टुकड़े 
0 राजेश उत्‍साही 
(छोकरा एक और दो के लिए क्रमश: छोकरा:एक और छोकरा:दो पर क्लिक करें।)

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails