| फोटो : राजेश उत्साही |
बेकार नहीं है चाहे
स्वेटर हो
या सपना
दोनों
जरूरत से उपजते हैं
बुने गए हों अगर
दिल और दिमाग से
तो बहुत काम आते हैं
जिंदगी भर
स्वेटर
सर्द वक्त के
लिए रखता है ऊष्मा
अपने में संजोकर
स्वेटर
किसी की
गर्म सांसों का अहसास-सा है
स्वेटर
रहता है
सालों साल साथ हमारे
अतीत की न जाने
कितनी यादों के एलबम की
तरह
होना
स्वेटर का
एक तसल्ली देता है
हरदम हमें
सपना या सपने
जब तक नहीं होते
साकार
रहते हैं साथ हमारे
भविष्य की घटनाओं की तरह
स्वेटर
की तरह सपनों की ऊष्मा
कम होती रहती है
धीरे-धीरे
स्वेटर
की तरह
सहेजते रहना
सपनों को
बनाता है जिंदगी को
कहीं अधिक आस्थावान
ऊष्मावान
इसलिए
बुनना
बेकार नहीं है
चाहे स्वेटर हो
या फिर सपना।
0 राजेश उत्साही