अब से
तीन बरस पहले तक
हर जन्मदिन पर
मां करती थीं माथे पर तिलक
उतारती थीं आरती
और बनाती थीं आटे में गुड़
घोलकर
गुलगुले
मां
वहीं हैं
मैं ही चला आया हूं
दूर उनसे
अब से
तीन बरस पहले तक
जन्मदिन पर
कभी बाबूजी स्वयं और
कभी-कभी उनका आर्शीवाद आता
था
टेलीफोन की घंटी के साथ
'खुश रहो'
बाबूजी
अब नहीं हैं
मैं भी तो चला आया था
दूर उनसे
अब से
तीन बरस पहले तक
पिछले 23 बरसों से
पहली शुभकामना नीमा ही देती
थीं
नीमा वहीं हैं
मैं भी वहीं हूं
भले ही चला आया हूं दूर
उनसे
अब से
तीन बरस पहले तक
सुबह-सुबह गोलू-मोलू
आंख मलते-मलते
'हैप्पी बर्थडे पापा' कहते
हुए लजाते थे
वे अब भेजते हैं
एसएमएस
क्योंकि नहीं हूं मैं पास
उनके
चला आया हूं दूर
अब से तीन बरस पहले तक।
0 राजेश उत्साही