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शनिवार, 21 अप्रैल 2012

पेड़ बनाम आदमी


                                                                       फोटो : राजेश उत्‍साही 

कमरे के कैलेंडर
कमरे की हवा के सहयोग से
करते हैं आवाज,बतियाते हैं जोर जोर से
कहते हैं
इस आदमी को कितनी बार समझाया
पर इसकी समझ में नहीं आया

अरे
इससे कहो
बंद करले दरवाजे, खिड़कियां
सिर्फ अपने तक रहे सीमित
न सुने,
न सुनाए बात-बात पर टि‍प्‍पणियां

मैं
समेटकर ध्‍यान अपने में सीमित
करने लगता हूं
उठकर कमरे के दरवाजे, खिड़कियां
बंद करने लगता हूं

तभी कमरे के बाहर
दूर-दूर तक फैले पेड़
बाहर की हवा के सहयोग से
करते हैं शोर, जोर जोर से

अरे ओ आदमी
तुम हम से यूं नजर न फेरो बेगानों की तरह
कुछ हमारे बारे में भी सोचो सच्‍चे इंसानों की तरह

तुम सब यूं अपने में सीमित हो जाओगे
यूं अपने अपने दायरों में बंद हो जाओगे
फिर हमारा क्‍या अस्तित्‍व होगा
फिर हमारा क्‍या महत्‍व होगा।
                         0 राजेश उत्‍साही 
मेरे ब्‍लाग यायावरी पर दिल्‍ली में एक दिन पोस्‍ट पर आपका स्‍वागत है। 

शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

स्‍वागत नए साल का



                                                                       फोटो : राजेश उत्‍साही 
पूछा मैंने
दोस्‍त से,
कैसे किया नए साल का
स्‍वागत ?

'बांधकर
कैलेंडर में
लटका दिया है
दीवार पर!'
वह बोली।

ठीक किया
अब रखना उसे
संभालकर,मैंने कहा।

सहेजना,जीना,
उसका हरेक दिन
कड़ी नजर रखना उन पर।

वरना
मौका मिलते ही
ति‍तलियों की तरह
गायब हो जाएंगे वे अनंत आकाश में
और तुम कहती
रह जाओगी
पता नहीं कहां चला गया नया साल
और
नए साल के दिन।
0 राजेश उत्‍साही

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