| फोटो : राजेश उत्साही |
फूल,
पौधे पर खिलें,
झाड़ी पर खिलें,
पेड़ पर खिलें,
या खिलें गमले में!
बगीचे में खिलें,
पहाड़ पर खिलें,
मैदान में खिलें,
या खिलें सरोवर में!
रेत में खिलें,
पत्थर में खिलें,
मिट्टी में खिलें
या खिलें कीचड़़ में!
फूलें,
जी भर फूलें,
पर न भूलें
उन्हें मुरझाना ही
है!
0 राजेश उत्साही