बुधवार, 5 जुलाई 2017

उम्‍मीद

उम्‍मीद
साथ हो तो
परछाईं भी
बगलगीर होती है

वरना
भंवर में छोड़कर जाने
वालों की क्‍या कमी है।

0 राजेश उत्‍साही

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी कविता बिलकुल सही मैसेज देती है की जब इंसान के पास उम्मीद रहती है, तब वह मुश्किल समय भी संभाल लेता है। लेकिन जब उम्मीद टूटती है, तब लोग भी जल्दी साथ छोड़ देते हैं।

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गुलमोहर के फूल आपको कैसे लगे आप बता रहे हैं न....

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