राजेश उत्साही
गुल्लक
यायावरी
शनिवार, 14 जून 2014
अप्रिय
गुरुवार, 22 मई 2014
रोशनी
गुरुवार, 12 दिसंबर 2013
परिचित-अपरिचित
परिचित
जगहों में
लोग अपरिचितों की तरह बरतते हैं
टकराते हैं
अपरिचित
जगहों पर
तो परिचितों की तरह मिलते हैं।
0 राजेश उत्साही
गुरुवार, 28 नवंबर 2013
अनपढ़ मन
फोटो : राजेश उत्साही
मैंने जो लिखा
वो तुमने पढ़ा नहीं,
तुमने जो पढ़ा
मैंने वो लिखा नहीं,
मन है कि अनपढ़ ही रहा
और अनपढ़ा ही रह गया...।
0 राजेश उत्साही
गुरुवार, 21 नवंबर 2013
परछाईंयां
फोटो : राजेश उत्साही
परछाईंयां
आदमी से
कभी आगे
तो कभी पीछे चलती हैं
आदमी के गिरने से पहले
परछाईंयां गिरती हैं।
0 राजेश उत्साही
गुरुवार, 10 अक्टूबर 2013
वे
शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2013
पुरखे
कुंवर रवीन्द्र की अनुमति एवं उनके सौजन्य से उनकी पेटिंग के साथ
पिता
नहीं रहे
नहीं रहना था
उन्हें एक दिन।
वे
अब पिता भी
नहीं रहे
शामिल हो गए
पुरखों में।
(2)
विदा
पुरखो विदा
आना अगले बरस।
कहां रहोगे
बरस भर
किस हाल में
इसकी चिंता
हम नहीं करेंगे।
0 राजेश उत्साही
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