गुरुवार, 28 नवंबर 2013
गुरुवार, 21 नवंबर 2013
गुरुवार, 10 अक्टूबर 2013
शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2013
सोमवार, 30 सितंबर 2013
ख्याली पुलाव
(1)
परिवार
चाय बेचता था
रेल में ही सही
चाय होती तो थी
बेटा
ख्याली पुलाव
बेचता है
ताजुब्ब की बात
यह है कि
लोग खरीदते भी
हैं।
(2)
देश में
बेरोजगारी खत्म
होने वाली है
ख्याली पुलाव
पकाने का
धंधा आजकल जोरों
पर है।
0 राजेश उत्साही
बुधवार, 25 सितंबर 2013
फूल
| फोटो : राजेश उत्साही |
फूल,
पौधे पर खिलें,
झाड़ी पर खिलें,
पेड़ पर खिलें,
या खिलें गमले में!
बगीचे में खिलें,
पहाड़ पर खिलें,
मैदान में खिलें,
या खिलें सरोवर में!
रेत में खिलें,
पत्थर में खिलें,
मिट्टी में खिलें
या खिलें कीचड़़ में!
फूलें,
जी भर फूलें,
पर न भूलें
उन्हें मुरझाना ही
है!
0 राजेश उत्साही
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