अपनी जीवनसंगिनी पर केन्द्रित यह कविता में पिछले साल भर से लिख रहा हूं। बीत गई 23 जून को हमारे वैवाहिक जीवन की रजत जयंती थी। सोचा था इस अवसर पर उन्हें इस कविता के माध्यम से शुभकामनाएं दूंगा। पर कविता पूरी नहीं हो सकी। अभी भी नहीं है। सोचता हूं कि जितनी है उसे यहां दूंगा तो उसे पूरी करने का नैतिक और भावनात्मक दबाव मेरे कवि पर बनेगा। तो जहां तक अभी पहुंच पाया हूं, उसे आप भी पढ़ें।
मेरी
जीवनसंगिनी
यानी कि पत्नी का नाम
निर्मला है
यह असली नाम है
बदला हुआ या काल्पनिक नहीं
पर हां प्यार से
या समझ लीजिए सुविधा से
मैं नीमा कहकर बुलाता हूं।
समस्या
निर्मला कहने में भी नहीं
पर पुकारते हुए कुछ ज्यादा ही
समय लगता है
और अब तो उन्हें भी
मुझसे नीमा सुनने की कुछ ऐसी आदत
सी हो गई है
कि मेरे मुंह से निर्मला
सुनत ही उन्हें लगता है कि कुछ गड़बड़ है।
मुझे याद है
जब नई नई शादी हुई थी
मेरी मौसेरी बहन
जिसे हम सरू पुकारते हैं
अपनी नई-नवेली भाभी को
उस जमाने के एक मशहूर वाशिंग पावडर
के नाम से जोड़कर
चिढ़ाती थी।
याद मुझे यह भी है कि
मेरे एक साहित्यिक मित्र
ब्रजेश परसाई ने
-जो अब नहीं हैं-
बधाई देते हुए कहा था
अब आप राजेश जी को
निर्मल वर्मा बना दें
संयोग की बात यह भी
कि निर्मला का सरनेम भी वर्मा ही है
और अब भी है।
जानने वाले परेशान हो जाते हैं
राजेश उत्साही,निर्मला वर्मा और बच्चों के नाम
के साथ पटेल सरनेम देखकर।
यह अलग बात है कि
वे अपना परिचय श्रीमती निर्मला राजेश
कहकर देती हैं
जो मुझे कभी अच्छा नहीं लगता
मैं हर औपचारिक जगह उनका परिचय
श्रीमती निर्मला वर्मा कहकर ही देता हूं।
पर मेरे कहने से क्या होता है
आसपड़ोस वाले उन्हें
श्रीमती उत्साही के नाम से जानते हैं।
एक मजेदार बात यह भी कि
एक बार मैंने घर के बाहर
नेमप्लेट की तरह
एक स्लेट पर अपने नाम के साथ साथ
पत्नी और
बच्चों के नाम भी लिखकर
लटका दिए थे
लिखा था
राजेश नीमा
कबीर उत्सव
नतीजा यह कि
एक पड़ोसी नीमा को मेरा
सरनेम ही समझने लगे थे
वे मुझे नीमा जी कहकर ही
बुलाते थे
मैं और नीमा सुनसुनकर बस हंसते थे।
निर्मला यानी नीमा
अपने मायके में नीमू हैं
नीमू दीदी या फिर नीमू बुआ
और ससुराल में तो वे निर्मला ही ठहरीं
अब आपको
जो भी ठीक लगे
आप बुला सकते हैं
नीमा,निर्मला या फिर नीमू।
नाम का चयन
इसलिए भी जरूरी है कि
क्योंकि आगे की कविता इन्हीं के बारे में है
चलिए
मैं तो नीमा कहता रहा हूं
सो नीमा ही कहूंगा
एक बार फिर आपको याद दिला दूं
कि यह काल्पनिक या परिवर्तित नाम नहीं है
एकदम सोलह आने सच्चा और खरा है
**राजेश उत्साही
(इस कविता का अगला भाग जल्द ही..)
