रविवार, 5 अगस्त 2012

दोस्‍त


                                                                               राजेश उत्‍साही 
दोस्‍त
बिछुड़कर भी
जो आता रहे
याद।
*
दोस्‍त
की
केवल एक ही जाति होती है
केवल एक ही राशि होती है
केवल एक ही धर्म होता है
केवल एक ही वर्ग होता है
केवल एक ही रंग होता है
केवल एक ही ढंग होता है
केवल एक ही कर्त्‍तव्‍य होता है
केवल एक ही अधिकार होता है
दोस्‍ती
*
दोस्‍त
अच्‍छा या बुरा
नहीं होता
दोस्‍त होता है।


0 राजेश उत्‍साही
                             

10 टिप्‍पणियां:

  1. सिर्फ़ अहसासों मे जी रही हूँ
    जरूरी तो नही ना
    मै भी औपचारिकता निभाऊँ
    सुना है
    दोस्ती के जज़्बे लफ़्ज़ों के मोहताज़ नही होते ………

    मेरे उन सभी दोस्तों के लिये जिनसे बात तक नही हो पाती मगर फिर भी उन्हे आस पास महसूसती हूँ।

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  2. दोस्त
    लिखता है
    कभी कभी
    दोस्ती पर भी...
    :-)

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  3. दोस्त को बाखूबी बयान किया है शब्दों में ...
    मज़ा आ गया ... आपको मित्रता दिवस की बधाई ...

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  4. MAI DOST KO YAAD
    KARTA HOO.
    DOST MUJHE YAAD
    KARTA HOGA. KYOKI.
    MAI USKA DOST HOO.
    WAH MERA DOST HAI.
    SIRF DOST.
    AUR KUCHH NAHI.
    DOST
    UDAY TAMHANE

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  5. दोस्‍त
    अच्‍छा या बुरा
    नहीं होता

    दोस्‍त होता है
    यही तो सच है दोस्‍ती का ...
    आभार

    उत्तर देंहटाएं

गुलमोहर के फूल आपको कैसे लगे आप बता रहे हैं न....

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