बुधवार, 25 सितंबर 2013

फूल



                                                                    फोटो : राजेश उत्‍साही
फूल,
पौधे पर खिलें,
झाड़ी पर खिलें,
पेड़ पर खिलें,
या खिलें गमले में!

बगीचे में खिलें,
पहाड़ पर खिलें,
मैदान में खिलें,
या खिलें सरोवर में!

रेत में खिलें,
पत्‍थर में खिलें,
मिट्टी में खिलें
या खिलें कीचड़़ में!

फूलें,
जी भर फूलें,
पर न भूलें
उन्‍हें मुरझाना ही है!
0 राजेश उत्‍साही

10 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  2. पर न भूलें

    उन्‍हें मुरझाना ही है
    सशक्‍त भाव

    उत्तर देंहटाएं
  3. इसे याद रखेंगे तो खुल कर खिलेंगे कैसे । मुरझाने के इन्तजार में सहमे ही रहेंगे । नही ?

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  4. फुल कहीं भी खिले ,यह जानकार कि उसे मुरझाना है
    जी भर खुलकर खिले अपनी यादे जो छोड़ जाना है ll
    नई पोस्ट साधू या शैतान
    latest post कानून और दंड

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  5. वाह ! सही कहा है आपने..यह याद रखेंगे तो जीभर कर खिलेंगे जब तक हैं..पर मुरझाने के बाद भी फूल भर जाते हैं माटी को अपनी मृत देह से..एक नया फूल खिलने के लिए सम्बल बन जाते हैं

    उत्तर देंहटाएं

गुलमोहर के फूल आपको कैसे लगे आप बता रहे हैं न....

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