शनिवार, 5 मई 2012

बच्‍चे और मृत्‍यु



                  फोटो: राजेश उत्‍साही
बच्‍चों को नहीं
बताया जाता कि
घर में मृत्‍यु हो गई है किसी की
क्‍योंकि वे समझते नहीं हैं
क्‍या है मृत्‍यु ?

बच्‍चे
किलकारियां भरते हैं
और खेलते रहते हैं
अपने में मगन

मैं सोचता हूं
क्‍या अंतर होता है
मृत्‍यु से प्रताडि़त जनों
और अबोध बच्‍चों में

बच्‍चे 
नहीं समझते मृत्‍यु को
पर क्‍या हम समझते हैं?

हम भी हिचकियां भर-भर के
रोते रहते हैं अपने में मगन
बच्‍चों की तरह !

0 राजेश उत्‍साही  

17 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत भावुक और गहन अर्थ लिए है रचना..............

    सादर.

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  2. ऐसे ही किसी सम्राट ने अपने पुत्र को मृत्यु से विमुख करना चाहा था.. इतिहास उस सम्राट को याद नहीं करता लेकिन पुत्र को गौतम बुद्ध के नाम से जानता है.. ऐसे पिताओं की श्रृंखला हैं सदियों से फैली.. आपने ठीक प्रश्न उठाया है कि बच्चे नहीं समझते मृत्यु को, पर क्या हम समझते हैं?
    गूढ़ अर्थों को छिपाए दार्शनिक कविता!!

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  3. सबने अपने अर्थों मे जाना
    किसी ने ना वास्तविक अर्थ पहचाना
    बच्चा नासमझ कहलाया
    और समझदार ने भी सिर्फ़
    अपने स्वार्थ वश दो आंसू टपकाया
    मगर मृत्यु का अर्थ
    कोई ना समझ पाया
    आत्मा का वस्त्र बदलना
    मानो दिन का बदलना है
    और इस हाल से हम सबको
    एक दिन गुजरना है
    तो क्यों ना जीवन
    सार्थक कर जाये
    जो प्रयाण महाप्रयाण बन जाये
    और मौत भी महोत्सव बन जाये

    जो महसूस किया वो लिख दिया ।

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  4. मृत्यु को समझना आसान नहीं ... हिचकियों में समझदारी नहीं होती

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  5. गूढ़ अर्थ लिए सुंदर रचना ....

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  6. हम्म..सोचने को मजबूर करती है, कविता

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  7. HUMARA SWARTH
    HUME ROOLATA HAI
    KISI KEE MRUTTYOO PAR.
    UDAY TAMHANE
    B.L.O.

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  8. बच्चे मृत्यु को सहजता से लेते हैं... उन्हें जीवन और मृत्यु के रहस्य का बोध नहीं होता.. जिसे बोध है वह बुद्ध है.. दार्शनिक कविता..

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  9. हम भी हिचकियां भर-भर के
    रोते रहते हैं अपने में मगन
    बच्‍चों की तरह !

    गहन अर्थ को लिए अच्छी रचना ...

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  10. इतनी सहजता से इतना निर्मम प्रहार! कमाल है!

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  11. बच्चे नहीं समझते मृत्यु को
    पर क्या हम समझते हैं

    गम्भीर सवाल है

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  12. बच्चे तो शायद समझ कर भी बच्चे बने रहते हैं पर अक्सर हम जानते ही नहीं की जाने वाला नहीं आ पाता लोट के ... बस यादें रह जाती हैं ...

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  13. हम भी हिचकियां भर-भर के
    रोते रहते हैं अपने में मगन
    बच्‍चों की तरह !
    गहन भाव लिए ये पंक्तियां

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  14. kuchh sochane ko vivash karati rachana .....badhai Utsahi ji

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गुलमोहर के फूल आपको कैसे लगे आप बता रहे हैं न....

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