शनिवार, 31 दिसंबर 2011

आओ फिर भी कहें, मुबारक नया साल !



  डॉलर के मुकाबले  
भाव हमें न मिले
सेंसेक्‍स में अपने
नहीं आया उछाल

आओ फिर भी कहें, मुबारक नया साल !
*
ऊपर वाले से गिला
हाय यह क्‍या सिला
छप्‍पर टूटा  ही रहा
और जल गई पुआल

आओ फिर भी कहें, मुबारक नया साल !
*
चले थे  जहां से हम
वहीं  आ  थमे कदम
बीत गया यूं ही बरस
हुआ नहीं कोई कमाल

आओ फिर भी कहें, मुबारक नया साल !
*
सपनों  को  थल नहीं
कश्‍ती को साहिल नहीं
उत्‍तरों  के हर द्वार पे
खड़े हैं  ज्‍वलंत सवाल

आओ फिर भी कहें, मुबारक नया साल !
*
दुनिया  में शोर हुआ
चर्चा भी घनघोर हुआ
भ्रष्‍टासुर संग साथ हैं
2012  बिन लोकपाल

आओ फिर भी कहें, मुबारक नया साल !
*
मजदूर  हैं  सब
मजबूर नहीं  रब
कुछ सोचे, समझे
हो न जाए बवाल

आओ फिर भी कहें, मुबारक नया साल !
                           *            
                                       0 राजेश उत्‍साही


15 टिप्‍पणियां:

  1. RAJESHJI,
    AAPKO AUR AAPKE PARIWAR KO BHI.
    NAYA SAAL MOOBARAK HO.
    UDAY TAMHANE
    BHOPAL.

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  2. UTTRO KE DWAR PAR KHADE HAI PRASHN.
    ACHCHHA HAI.
    UDAY TAMHANE.
    BHOPAL.

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  3. आशा, निराशा और हताशा के बीच गया बीस ग्यारह.. स्वागत करें बीस बारह का!!

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  4. आपको और आपके परिवार को नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं!

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  5. Nav Varsh pr apko Hardik shubhkamanayen ... Naye pr apki racha kafi dilchsp lagi ...abhar.

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  6. बे लगाम है महगाई
    सच्चाई न जीत पाई
    प्रजा तंत्र कि बलि चढाई
    घोटालों की बाढ़ आई
    फिर भी कहे नव वर्ष की बधाई

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  7. एक और नए वर्ष का आरंभ हो रहा है। कुछ लोग अतिवादी सोच रखते हैं। उनके विचार में नए वर्ष की परिकल्पना बेमानी है क्योंकि इस दिन दीवार पर लटके कैलेंडर के अतिरिक्त कुछ नहीं बदलता। बेशक वो जश्न मनाने में विश्वास न रखते हो, किंतु जीवनयात्रा में यह दिन एक पड़ाव तो है और बीतता हर पल हमें पहले के मुकाबले ज्यादा आत्मविश्वासी बनाता है, हमारे तर्जुबों में कुछ और दिन जोड़ता है। दौड़ते-भागते जीवन में क्षणभर ठिठककर सोचने का अवसर देता है। स्वयं को टटोलने का एक मौका देता है कि बीते दिनों में हमने क्या कुछ खोया और पाया। इसलिए एक नया साल इतनी आशा तो रख ही सकता है कि एक नई ताजगी, नई आशावादी सोच और कुछ निश्चयों के साथ उसकी शुरूआत की जाए।
    उमेश कुमार

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  8. नववर्ष की अनंत शुभकामनाओं के साथ सार्थक व सटीक प्रस्‍तुति ।

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  9. खूबसूरत कविता... नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें...

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  10. फिर भी कहें मुबारक नया साल

    जय हो

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  11. मुबारक हो मुबारक हो
    हों चाहे
    जिस हाल।

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  12. नए साल के प्रति आपकी सही शिकायत है और न हम काल चक्र रोक सकते हें और न ही इस व्यवस्था को बदल सकते हें सो ऐसे ही स्वागत कर उसे आने देते हें.
    नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !

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  13. मजदूर है सब
    मजबूर नहीं सब
    कुछ सोचे, समझे
    हो न जाय बवाल
    आओ फिर भी कहें, मुबारक नया साल!
    ...सच मजदूर तो सभी हैं, एक ऊपर वाला ही दाता है ....
    बहुत बढ़िया सार्थक मंथन ..
    ..शुभकामनायें देने का प्रचलन जो बन गया हैं.. यह भी अब हमारा एक फैशन निकल पड़ा है..इसलिए शुभकामनायें देने में कंजूसी नहीं ...हार्दिक शुभकामनायें... .

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  14. नए वर्ष की बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,बढ़िया प्रस्तुति,....
    welcome to new post--जिन्दगीं--

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गुलमोहर के फूल आपको कैसे लगे आप बता रहे हैं न....

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