मंगलवार, 2 अप्रैल 2013

अनुभव


                                                                             राजेश उत्‍साही
अतीत के कूप से
जरूरत के लोटे से 
अनुभवों का जल खींचता हूं
कार्यों की फसल बोने से पहले
वर्तमान को सींचता हूं।
0 राजेश उत्‍साही

4 टिप्‍पणियां:

  1. जरूरत के लोटे से

    अनुभवों का जल ....
    अनुपम भाव संयोजन
    आभार

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  2. तब जो बीज अंकुरित होते हैं
    उन्हें मुझ पर और मुझे उस पर भरोसा होता है ....

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  3. लहलहाते रहें दिन.....

    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं

गुलमोहर के फूल आपको कैसे लगे आप बता रहे हैं न....

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