बुधवार, 13 जनवरी 2010

प्रतीक्षा का अंत

॥ प्रतीक्षा का अंत ॥
प्रतीक्षा का अंत
होना कुछ
इस तरह कि
जैसे वह कभी थी ही नहीं
बहुत नागवार गुजरता है



क्योंकि
प्रतीक्षा बीज है
अपने में छिपाए
संभावनाएं तमाम

प्रतीक्षा
डाली पर लगी
अधखिली कली है

प्रतीक्षा
समय के गर्भ में
विकसित हो रहा भ्रूण है

प्रतीक्षा
ही है,जो हमें
जीवन में आस्था बनाए
रखने का हौसला
देती है

इसीलिए
बहुत नागवार गुजरता है
अंत होना कुछ इस तरह
कि जैसे थी ही नहीं
प्रतीक्षा!



3 टिप्‍पणियां:

  1. dono hi rachnayein behtreen............bhavon ko khoob sanjoya hai.......dono hi rachnayein bejod.......badhayi.

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  2. "GOOLMOHAR" GUR HAMARA NAAM HOTA HUME BHI HAJARO ADHATE. @ UDAY. TAMHANEY. BHOPAL. 9200184289

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत उत्कृष्ट अभिव्यक्ति.हार्दिक बधाई और शुभकामनायें!
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |


    http://madan-saxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena.blogspot.in/
    http://madanmohansaxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena69.blogspot.in/

    उत्तर देंहटाएं

गुलमोहर के फूल आपको कैसे लगे आप बता रहे हैं न....

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