सोमवार, 3 जुलाई 2017

आवाज़


11 टिप्‍पणियां:

  1. ये लाइनें कालजयी हैं, सर। बधाई

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  2. वाह बड़ी ही सुन्दर रचना है। बधाई हो आपको। Mahadev Pic

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  3. आपने बहुत कम शब्दों में बड़ी बात कह दी। अंधेरे में एक मोमबत्ती और अन्याय के सामने उठती एक आवाज़, दोनों उम्मीद और बदलाव का प्रतीक बन जाते हैं। अक्सर लोग सोचते हैं कि अकेले कुछ नहीं बदल सकता, लेकिन हर बड़ा परिवर्तन किसी एक छोटे कदम से ही शुरू होता है। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.

    अधिक जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी - HindiDiscussionForum dot com
    धन्यवाद!

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गुलमोहर के फूल आपको कैसे लगे आप बता रहे हैं न....

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