गुरुवार, 29 मार्च 2012

तपन


रूठी हुई
खुशियों का नाम 
उदासी है

भोगो तो 
हर तपन बड़ी है
कहने को 
बात जरा-सी है । 

0 राजेश उत्‍साही 

23 टिप्‍पणियां:

  1. भोगो तो तपन बड़ी ही ..... वाह बहुत गहन बात ... सुंदर क्षणिका

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  2. गहन भाव समेटे हुए ..उत्‍कृष्‍ट पंक्तियां

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  3. तपन तो होती ही बडी है चाहे छोटी ही क्यों ना हो।

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  4. कहने पर हल्की सी हो जाती है ... जो तपता है वही जानता है

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  5. अतिसुन्दर सारगर्भित रचना , बधाई

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  6. बहुत खूब..

    समझो तो
    बात बहुत कुछ है
    ना समझो तो
    कविता
    छोटी सी है।

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  7. गहरी बात है राजेश जी ... छोटी सी कविता में ...

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  8. वाह!!!!!!!!!

    बहुत खूबसूरत.

    अनु

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  9. भोगो तो हर तपन बड़ी है, कहने को बात जरा सी है... गागर में सागर समाया है... दिखने में रचना छोटी जरूर है लेकिन अत्यंत प्रभावशाली ... इतने सुन्दर लेखन के लिए बधाई...
    सादर
    मंजु

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  10. KHOOSHI
    AUR
    GUM
    KEWAL
    MAN KEE
    SOCH HAI.
    UDAY TAMHANE
    B.L.O.
    BHOPAL

    उत्तर देंहटाएं
  11. LEKIN
    BHOGANE
    KE BAAD
    TAPAN
    CHHOTI HAI

    UDAY TAMHANE
    B.L.O.
    BHOPAL

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  12. बहुत गहन बातें लिखीं हैं आपने ...छोटी छोटी पंक्तियों में ....आज आपका ब्लॉग ज्वाइन किया
    आभार ...

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  13. यह तो है, जो आपबीती हो, उसका दर्द तो हम स्वयं ही समझ सकते हैं. छोटी सी पंक्तियों में बहुत सुन्दर बात कह दी आप ने.

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  14. कम शब्दों में गहरी बात ... बहुत खूब !!

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  15. वाह! थोड़े शब्दों में बहुत बड़ी बात कह दी है आपने, अच्छी कविता के लिए बधाई। एस. सी. ई. आर. टी. रायपुर में आपसे मुलाकात हुई थी, शायद याद हो आपको । बहुत अच्छा लगा आपके ब्लाग पर आकर।

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  16. बहुत ही भावपूर्ण प्रस्तुति । मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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गुलमोहर के फूल आपको कैसे लगे आप बता रहे हैं न....

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