शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2012

विडम्‍बना


                  फोटो : राजेश उत्‍साही 
।।एक।।
हम
बनाते हैं सुंदर अक्षरों की 
अनेक चि‍ड़ि‍यां
और पाते हैं चंद सिक्‍के
वे बिठाते हैं अपने हस्‍ताक्षर की 
केवल एक चि‍ड़ि‍या 
और पाते हैं ढेर-से।  

।।दो।।
संतरी
पहरा देता है मंत्री के घर
और मंत्री महोदय
लूटते हैं घर संतरी का।
0 राजेश उत्‍साही  

21 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सटीक बात कही है आपने ...आभार ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह! राजेश जी बहुत ही जानदार प्रस्तुति है आपकी.
    संतरी का घर सही में मंत्री ही लूट रहे हैं जी.

    अनुपम प्रस्तुति के लिए आभार.

    मेरे ब्लॉग पर आईएगा.

    उत्तर देंहटाएं
  3. वह राजेश सर !
    ....इसे तो याद रखना है

    उत्तर देंहटाएं
  4. कुछ शब्दों की गूढता इसे ही कहते हैं ...

    उत्तर देंहटाएं
  5. मार्मिक विरोधाभास.. वास्तविकता के धरातल पर!!

    उत्तर देंहटाएं
  6. आज की परिस्थितयों पर गहरा कटाक्ष करती पंक्तियाँ

    उत्तर देंहटाएं
  7. दोनो का तीखापन चटाकेदार स्वाद दे रहा है !

    उत्तर देंहटाएं
  8. व्यवस्था पर तीखा प्रहार किया है आपने...
    काश यह सच्चाई वक्त रहते आम जन की समझ में आ पाता !

    उत्तर देंहटाएं
  9. आपकी लेखनी में बहुत दम है एवं एक तीखा व्यंग भी ।| इस पोस्ट के बाद कुछ इससे भी इतर पोस्ट की प्रतीक्षा रहेगी । | मेरे नए पोस्ट "जयप्रकाश नारायण" पर आपका इंतजार रहेगा । आभार

    उत्तर देंहटाएं
  10. आपसे हमने क्षणिकाएं मांगी थी
    और आपने अब तक नहीं भेजीं .....?

    उत्तर देंहटाएं
  11. सार्थक एवं सुंदर प्रस्तुति के लिए धन्यवाद । मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा ।

    उत्तर देंहटाएं
  12. वाह वाह राजेश जी क्या कटाक्ष किया है. बहुत सुंदर प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं

गुलमोहर के फूल आपको कैसे लगे आप बता रहे हैं न....

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails