शुक्रवार, 10 अप्रैल 2015

लिफ्ट मांगते बच्‍चे


पीठ पर
बस्‍ता लादे
सड़क किनारे
लिफ्ट मांगते बच्‍चे
स्‍कूल आने से पहले
सीखते हैं अस्‍वीकृत होना
सीखते हैं अस्‍वीकृति को स्‍वीकारना
सीखते हैं असंकोचीपना
सीखते हैं बेशर्म होना
सीखते हैं असंवेदनशीलता
सीखते हैं हिकारत की भाषा
सीखते हैं वे दुनिया को गरियाना। 


पीठ पर
बस्‍ता लादे
सड़क किनारे
लिफ्ट मांगते बच्‍चे
स्‍कूल पहुंचने से पहले
सीखते हैं अच्‍छे और बुरे का फर्क
सीखते हैं सूरत और सीरत का फर्क
सीखते हैं दुनिया को संबोधित करना
सीखते हैं अपने लिए जगह खोजना
सीखते हैं वे शुक्रिया अदा करना।

पीठ पर
बस्‍ता लादे
सड़क किनारे
लिफ्ट मांगते बच्‍चे
कितना कुछ सीखते हैं
बिना कुछ सिखाए ही
बिना स्‍कूल जाए।
0 राजेश उत्‍साही

2 टिप्‍पणियां:

  1. जिंदगी बहुत कुछ सिखा देती है..हर घड़ी हर जगह हर किसी को..

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  2. बहुत ही सुंदर रचना की प्रस्‍तुति। मेरे ब्‍लाग पर आपका स्‍वागत है।

    उत्तर देंहटाएं

गुलमोहर के फूल आपको कैसे लगे आप बता रहे हैं न....

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